देहरादून: उत्तराखंड में अगले साल 2027 में विधानसभा होने है. चुनावी से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है.
बीजेपी को घेरने के लिए कांग्रेस ने मिशन मिनिस्टर्स (Mission Ministers) पर काम करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस अपनी मिशन मिनिस्टर्स की रणनीति के तहत मंत्रियों की विधानसभाओं में बीजेपी को जोरदार झटना देने की तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं कैसे?

उत्तराखंड की सियासत में चुनावी हलचल तेज होती जा रही है. इसी के साथ राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं. इस बीच Indian National Congress ने भाजपा को सीधे टारगेट करने के लिए मिशन मिनिस्टर्स नाम से एक खास अभियान शुरू किया है.
पारंपरिक तरीके से नहीं लड़ना चाहती कांग्रेस: इस रणनीति के तहत कांग्रेस, राज्य सरकार के मंत्रियों की विधानसभा सीटों पर फोकस करते हुए उन्हें राजनीतिक तौर पर घेरने की तैयारी कर रही है. दरअसल, कांग्रेस इस बार चुनावी मुकाबले को पारंपरिक तरीके से नहीं लड़ना चाहती, बल्कि इसके उल्ट कांग्रेस ने बीजेपी की उन विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जहां उनके विधायक मंत्री पद पर हैं.
कांग्रेस का मानना है कि इन सीटों पर मजबूत स्थानीय चेहरों को उतारकर भाजपा को सीधी चुनौती दी जा सकती है. यही वजह है कि मिशन मिनिस्टर के तहत कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चार मंत्रियों की सीटों समेत कुल छह विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.

कांग्रेस ने शामिल हो सकते हैं कई बड़े नेता: इस अभियान की शुरुआत बड़े स्तर पर ज्वाइनिंग कार्यक्रम से हो रही है. दिल्ली में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के कई प्रभावशाली नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को भी दिल्ली बुलाया गया है.
बीजेपी के मंत्रियों की चुनौती देने की तैयारी: इनमें गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और तिलक राज बेहड़ जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं. इन नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस अभियान को बेहद गंभीरता से ले रही है. कांग्रेस की रणनीति का सबसे अहम पहलू यह है कि पार्टी ऐसे नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है और जो सीधे तौर पर भाजपा के मंत्रियों को चुनौती दे सकते हैं.
मसूरी से बड़ा चेहरा कांग्रेस में हो सकता है शामिल: उदाहरण के तौर पर मसूरी विधानसभा सीट से नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके अनुज गुप्ता को कांग्रेस में शामिल कराने की तैयारी है. इस सीट से भाजपा के विधायक गणेश जोशी हैं, जो राज्य सरकार में मंत्री भी हैं.
रुड़की सीट पर भी कांग्रेस का प्लान: इसी तरह रुड़की सीट पर भी कांग्रेस ने बड़ी रणनीति बनाई है. यहां पूर्व मेयर गौरव गोयल को पार्टी में शामिल किए जाने की चर्चा है. इस सीट से भाजपा के विधायक प्रदीप बत्रा हैं, जिन्हें हाल ही में पुष्कर सिंह धामी सरकार में मंत्री बनाया गया है. कांग्रेस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों की एंट्री से इन सीटों पर मुकाबला कड़ा किया जा सकता है.
सितारगंज सीट पर भी कांग्रेस की नजर: सितारगंज विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस की नजर है. यहां पूर्व विधायक नारायण पाल को पार्टी में शामिल करने की तैयारी चल रही है. वर्तमान में इस सीट से भाजपा के सौरभ बहुगुणा विधायक हैं, जो राज्य सरकार में मंत्री भी हैं.
भीमताल सीट को लेकर भी कांग्रेस गंभीर: इसके अलावा भीमताल सीट पर भी कांग्रेस सक्रिय नजर आ रही है, जहां भाजपा के मंत्री राम सिंह कैड़ा के खिलाफ संगठनात्मक समीकरण बदले जा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों को साधा जा रहा है. कांग्रेस सिर्फ इन चार सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है.
घनसाली और रुद्रपुर में भी कांग्रेस करेगी खेल: घनसाली से पूर्व विधायक भीमलाल आर्य और रुद्रपुर से भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के भी कांग्रेस में शामिल होने की खबरें हैं. यदि ये ज्वाइनिंग होती हैं, तो इससे कांग्रेस को कई सीटों पर सीधा फायदा मिल सकता है और पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होगा. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पुष्टि की है कि,
दिल्ली में कई बड़े नेता कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं और आने वाले समय में यह सिलसिला और तेज होगा. प्रदेश में राजनीतिक माहौल बदल रहा है और कई नेता कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं.
- प्रीतम सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता –
बीजेपी को चुनौती देगी कांग्रेस: मिशन मिनिस्टर्स के जरिए कांग्रेस उत्तराखंड की राजनीति में आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है. कांग्रेस की कोशिश है कि मंत्रियों की सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारकर भाजपा के प्रभाव को कमजोर किया जाए. वहीं भाजपा इस रणनीति को खारिज करते हुए अपने संगठन और सरकार के कामकाज पर भरोसा जता रही है.
अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस का यह मिशन मिनिस्टर जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाता है और क्या यह रणनीति भाजपा को वास्तव में नुकसान पहुंचा पाएगी या नहीं. आगामी चुनावों में इसका असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा.

