AIIMS ऋषिकेश के सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में युवा सामाजिक समारोहों में असहज महसूस कर रहे हैं और अपनी बातों को महत्व न मिलने की भावना से जूझ रहे हैं।
कई युवाओं ने चिंता, शैक्षणिक दबाव और आत्म-क्षति जैसे विचारों का भी अनुभव साझा किया, जो उनके भावनात्मक स्वास्थ्य पर गंभीर असर का संकेत देता है।
डिजिटल तकनीक का बढ़ता उपयोग, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में गिरावट भी युवाओं की दिनचर्या और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं की इन चुनौतियों को समझने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, ताकि समय रहते सही मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके।
स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित डिजिटल उपयोग, पर्याप्त नींद और खुलकर संवाद जैसी आदतें मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

