उत्तराखंड में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और कथित मनमानी को लेकर सियासत तेज हो गई है।
अखंड परशुराम अखाडा के पंडित अधीर कौशिक जी ने निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी स्कूलों की “लूट-खसोट” अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है और यदि जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो हमर अखाड़ा सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
अधीर कौशिक जी ने कहा कि एक ओर जहां महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल लगातार फीस में बढ़ोतरी कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय बना चुके हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई अभिभावक बढ़ी हुई फीस भरने में असमर्थ हैं, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों का नाम निजी स्कूलों से कटवाकर सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ रहा है। लेकिन सरकारी स्कूलों की स्थिति भी चिंताजनक है, जिससे बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
निजी स्कूल एडमिशन के नाम पर 10 से 20 ₹30000 ले रही है मध्यम वर्ग कहां से उनकी व्यवस्था करेगा यह सोचने का विषय और निजी स्कूलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री या तो विदेश दौरों में व्यस्त रहते हैं या चुनावी कार्यक्रमों में, जिसके कारण उन्हें प्रदेश के अभिभावकों की समस्याएं दिखाई नहीं दे रही हैं।
कौशिक जी ने सरकार पर “कुंभकर्णीय नींद” में होने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन सरकार पूरी तरह निष्क्रिय बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजी स्कूलों की मनमानी पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो हम आम जनता के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगी। मध्यवर्ग के बच्चे निजी विद्यालयों में कैसे पढ़ेंगे फीस में लगातार वृद्धि हो रही है बिल्डिंग के नाम पर शोषण हो रहा है कोई सुनने को तैयार नहीं है हमारा निवेदन सरकार जाएगी तत्काल जिन विद्यालय द्वारा फीस वृद्धि की गई है और एडमिशन फीस के नाम पर मोटी रकम ले रही है उनके खिलाफ शासन प्रशासन सख्त कार्रवाई करें अन्यथा हम सभी अभिभावकों को साथ लेकर स्कूलों के सामने धरना दिया जाएगा एक और तो सरकार यूजीसी जैसा कानून विश्वविद्यालय में बच्चों का शोषण करवाना चाहती है दूसरी और निजी विद्यालयों में बच्चों की फीस बढ़ाकर एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूल रही है
इसके साथ ही उन्होंने निजी स्कूलों पर किताबों और ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों का शोषण करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई स्कूल हर साल सिलेबस और यूनिफॉर्म बदल देते हैं, जिससे अभिभावकों को हर बार नई किताबें और ड्रेस खरीदनी पड़ती हैं। उन्होंने इसे स्कूल प्रबंधन, प्रकाशकों और ड्रेस विक्रेताओं के बीच कमीशनखोरी का खेल बताया।
श्री कौशिक जी ” ने स्कूल प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि वे तत्काल फीस वृद्धि को वापस लें, अन्यथा हमारा परशुराम अखाड़ा जनता के साथ मिलकर जोरदार आंदोलन करेगा , जो तब तक जारी रहेगा जब तक निजी विद्यालयों में बढ़ी हुई फीस और एडमिशन के नाम कर लोगों का शोषण बंद नहीं होगा

