GANGA NEWS 24 | पिथौरागढ़ से रिपोर्ट – कुंडल चौहान
बेशकीमती कीड़ा जड़ी की कीमत हुई कम, 70% दाम घटे – नहीं मिल रहे खरीदार
पिथौरागढ़। यौन शक्ति वर्धक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा बनाने के लिए उपयोगी बेशकीमती कीड़ा जड़ी यानी यार्सा गंबू की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमत कम हो गई है जो इसे निकालने वाले लोगों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
उच्च हिमालयी इलाकों के ग्रामीणों के लिए यही कीड़ा-जड़ी कभी सोने की तरह हुआ करती थी। जिले में हर वर्ष करीब 70 से 180 किलो कीड़ा-जड़ी का पातन होता है जो मुनस्यारी, मल्ला जोहार और धारचूला क्षेत्र के करीब 2000 परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
जिले के रालम, राजरभा, नागनीधुरा, छिपलाकेदार, धरतीधार, पंचाचूली की तलहटी स्थित बलाती, रुद्रखान समेत कई बुग्याल और ग्लेशियर कीड़ा जड़ी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
धरचूला और मुनस्यारी तहसील के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मिलने वाली कीड़ा जड़ी की कीमत पिछले तीन-चार वर्षों में 16-17 लाख रुपये प्रतिकिलो से घटकर सिर्फ तीन-चार लाख रुपये रह गई है। हालात यह है कि इतनी कम कीमत पर भी ग्रामीणों को खरीदार मिलना मुश्किल हो गया है।
चीन है सबसे बड़ा खरीदार: पिथौरागढ़/मुनस्यारी – आधा हिस्सा कीड़ा और आधा हिस्सा जड़ी जैसा दिखने के कारण यार्सा गंबू को कीड़ा-जड़ी कहा जाता है। लंबे समय से यह नेपाल के रास्ते चीन की मंडी तक पहुंचती रही है। चीन कीड़ा-जड़ी का सबसे बड़ा खरीदार है।
🔴 पिथौरागढ़ – हिमालयी सोने का भाव धड़ाम!
बेशकीमती कीड़ा जड़ी (यार्सा गंबू) के दाम 70% घटे!
💰 पहले: ₹16-17 लाख/किलो
📉 अब: ₹3-4 लाख/किलो
😢 2000 परिवारों की आजीविका पर संकट, खरीदार ही नहीं मिल रहे!

