मनोज ठाकुर
GANGA NEWS 24 | हरिद्वार एडिशन | आध्यात्मिक विशेषांक
🔴 BREAKING – हरिद्वार में रचा गया इतिहास, जापान के दो संत बने महामंडलेश्वर


हरिद्वार। सनातन धर्म के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। निरंजनी अखाड़े ने जापान से आए दो संतों को महामंडलेश्वर की सर्वोच्च उपाधि से विभूषित किया है।
निरंजनी अखाड़े की छत्रछाया में आयोजित भव्य पट्टाभिषेक समारोह में श्री केन्ता इशियामा (वल्लालर) को सन्यास के बाद श्री महादेव गिरी जी महाराज और श्री दाईसाकू नारीता (सेन्थिल नाथन) को श्री कृष्णा गिरी जी महाराज के नाम से महामंडलेश्वर बनाया गया।
समारोह की खास बातें:
- इस ऐतिहासिक समारोह की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महामंडलेश्वर डॉ. रविन्द्र पुरी जी महाराज ने की।
- सचिव श्री महंत राम रतन गिरी महाराज, स्वामी दर्शन भारती जी और निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
- लाल छत्र के नीचे फूलों की वर्षा के बीच दोनों जापानी संतों का विधिवत अभिषेक किया गया।
कौन हैं ये जापानी संत?
ये दोनों संत महामंडलेश्वर बालकुंभ पुरी महाराज (पूर्व में ताकायुकी होशी) की शिष्य परंपरा से हैं। बालकुंभ पुरी जी ने टोक्यो में अपना करोड़ों का ब्यूटी कारोबार छोड़कर सनातन धर्म अपनाया था और जापान में 2500 से ज्यादा शिष्य बनाए। अब उनके शिष्य भी सनातन प्रचार में जुटे हैं।
- श्री महादेव गिरी (केन्ता इशियामा – वल्लालर): तमिल शैव संत वल्लालर परंपरा से जुड़े हैं। जीव दया और प्रकाश स्वरूप ईश्वर की साधना करते हैं।
- श्री कृष्णा गिरी (दाईसाकू नारीता – सेन्थिल नाथन): भगवान कार्तिकेय के तमिल नाम सेन्थिल नाथन से प्रेरित, ध्यान-योग और वैदिक संस्कारों का जापान में प्रचार कर रहे हैं।
महंत रविन्द्र पुरी जी ने कहा, “ये सनातन की जीत है। अब धर्म की कोई सीमा नहीं रही। जापान तक गंगा की धारा बह रही है।”
अखाड़े की योजना है कि 2027 के हरिद्वार कुंभ में 1000 जापानी श्रद्धालु आएंगे और जापान में पहली धर्म संसद आयोजित की जाएगी।
रिपोर्ट – कुलदीप, Ganga News 24, हरिद्वार

