मोदी सरकार ला रही है स्कूलों में दादा-दादी लर्निंग गेम योजना

लर्निंग गेम्स’ कराए जाएंगे।

मतलब किताबी पढ़ाई नहीं, बल्कि कहानी सुनाना

लर्निंग गेम्स’ कराए जाएंगे।

मतलब किताबी पढ़ाई नहीं, बल्कि कहानी सुनाना

क्या है प्लान –
सामाजिक न्याय विभाग + रामकृष्ण मिशन का ‘Creating Inter-Generational Bonding’ प्रोजेक्ट। देश के 200 स्कूलों में पायलट के तौर पर दादा-दादी, माता-पिता और बच्चों के बीच ‘को-लर्निंग गेम्स’ कराए जाएंगे।

मतलब किताबी पढ़ाई नहीं, बल्कि कहानी सुनाना, पारंपरिक खेल, संस्कार, खेती-बाड़ी, नैतिक शिक्षा जैसी चीजें बुजुर्ग बच्चों को सिखाएंगे और बच्चे बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया से जोड़ेंगे।

कारगर क्यों हो सकती है –

  1. आज की जरूरत है: न्यूक्लियर फैमिली और मोबाइल की लत ने तीन पीढ़ियों के बीच गैप बहुत बढ़ा दिया है। बुजुर्गों में अकेलापन और बच्चों में भावनात्मक असुरक्षा दोनों बढ़ रहे हैं।
  2. सीखना दो-तरफा होगा: बुजुर्गों को सम्मान और उपयोगिता का एहसास होगा, बच्चों को रूट्स और वैल्यूज मिलेंगे।
  3. स्कूल सबसे सही जगह है: घर में समय नहीं मिलता, लेकिन स्कूल में स्ट्रक्चर्ड एक्टिविटी से सभी पेरेंट्स को आना ही पड़ेगा।

चुनौती क्या रहेगी –
सिर्फ गेम्स करा देना काफी नहीं है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्कूल इसे इवेंट बनाकर करते हैं या कल्चर बनाकर। अगर दादा-दादी को सिर्फ साल में एक बार बुलाकर फोटो खिंचवा ली, तो असर नहीं होगा। इसे लगातार, लोकल भाषा और लोकल कहानियों के साथ जोड़ना पड़ेगा।

कुल मिलाकर, अगर ये 200 स्कूलों के पायलट से निकलकर रोज की प्रार्थना या महीने की एक क्लास जैसा हिस्सा बन गया, तो ये सिर्फ योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार साबित हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *