उप्र मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का दो साल का कार्यकाल समाप्त, वादे अधूरे रह गए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का दो वर्ष का कार्यकाल 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। इस दौरान पत्रकार हितों के लिए किए गए प्रयास चर्चाओं में तो रहे, लेकिन कई अहम वादे अधूरे रह गए।
समिति के कार्यकाल के दौरान उठाए गए मुद्दे और उनकी वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार रही –
1. समिति के वरिष्ठ सदस्य स्व. दिलीप सिन्हा के परिवार को आर्थिक सहयोग का वादा अधूरा रह गया।
2. सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों के लिए अलग पंजीकरण काउंटर की मांग पर सिर्फ आश्वासन मिला।
3. वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन लागू कराने का मामला प्रत्यावेदन तक ही सीमित रहा।
4. पत्रकारों को मान्यता देने वाली समिति का गठन दो साल में नहीं हो सका।
5. पत्रकारों को रियायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने की बात भी पूरी नहीं हो सकी।
6. पत्रकारों पर हुए हमलों और फर्जी मुकदमों के विरोध में ठोस आवाज नहीं उठ सकी।
7. लोक बहादुर शास्त्री भवन के प्रेस रूम पर लगा ताला खुलवाने का प्रयास भी अधूरा रहा।
8. समिति की तिमाही बैठकें नियमित रूप से नहीं हो सकीं।
9. मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने का वादा भी पूरा नहीं हो सका।
ऐसे में कई पत्रकारों का मानना है कि अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए समिति के कार्यकाल को एक वर्ष और बढ़ाया जाना चाहिए, हालांकि इसे आधिकारिक रूप से कौन बढ़ाएगा, यह सवाल बना हुआ है.

