सरकार अधिकारियों के आगे कर कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है राहुल गांधी के कार्यक्रम का स्थान बदलना अच्छा नहीं है
मुख्य विपक्षी दल के नेता Rahul Gandhi जी के 17 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए परेड ग्राउंड की अनुमति को निरस्त किया जाना कोई छोटी घटना नहीं है, यह सीधे-सीधे लोकतंत्र का गला घोटने वाली एक तानाशाही नीति है।
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक व्यवस्था में यदि इस प्रकार की घटनाएं हो तो समझ जाना चाहिए कि यह एक प्रकार का अघोषित आपातकाल है।
धामी सरकार में हुई पेपर लीक की अनगिनत घटनाओं से पेपर लीक की जांचें तो करवाई गई परन्तु एक भी जांच अंजाम तक नहीं पहुंची।

पिछले वर्ष हुई पेपर लीक की घटना में भी सीबीआई जांच के आदेश हुए परन्तु जांच का पता नहीं कि किस स्टेज पर है।
सीबीआई जांच के दायरे में केवल 21 सितंबर की घटना को लाया गया जबकि 20 सितंबर को दो नकल माफियाओं की गिरफ्तारी हो चुकी थी।
ऐसा प्रतीत होता है कि, धामी सरकार नहीं चाहती कि पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश लगे, इसलिए कई बार बेरोजगार संघ के आंदोलनों की अनुमति भी खारिज की गई है।
सिस्टम में बैठे नुमाइंदे इस बात का ध्यान रखें कि आने वाले समय में व्यवस्था भी बदलेगी और सत्ता भी बदलेगी इसलिए कार्रवाई उस स्तर की करना जिस कार्रवाई को बाद में झेल भी पाएं।
बेरोजगारी संघ के द्वारा राहुल गांधी की रैली को स्थान बदलने को लेकर बड़ा बयान दिया भारतीय जनता पार्टी की घबराहट नजर आई समय पर आकर स्थान बदलना यह देश में लोकतंत्र को खतरा है

