प्रेमानंद महाराज के सामने एक लड़के की भेजी हुई चिट्ठी पढ़ते हुए उनके शिष्य बताते हैं, ‘मेरे मन ने जीना मुश्किल कर दिया है। मैं टूट-सा गया हूं, हार गया हूं। बस आप कृपा करो।’

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के पास तमाम लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।

कोई करियर को लेकर मार्गदर्शन चाहता है, तो कोई व्यापार, नशे की लत, रिश्तों में उलझन या बच्चों की परवरिश से जुड़े मामलों में उनसे परामर्श मांगता है।

इसी क्रम में हाल ही में एक युवक भी उनके पास पहुंचा। उसने बताया कि उसके मन ने उसका जीना मुश्किल कर दिया है और उसे डर है कि कहीं वह पागल न हो जाए।

युवक की बात सुनने के बाद प्रेमानंद महाराज ने उसे जवाब देने के साथ-साथ माता-पिता के लिए भी एक अहम सीख दी। ऐसा उन्‍होंने क्‍या कहा, चल‍िए जानते हैं व‍िस्‍तार से।

प्रेमानंद महाराज के सामने एक लड़के की भेजी हुई चिट्ठी पढ़ते हुए उनके शिष्य बताते हैं, ‘मेरे मन ने जीना मुश्किल कर दिया है। मैं टूट-सा गया हूं, हार गया हूं। बस आप कृपा करो।’

यह सुनने के बाद प्रेमानंद महाराज कहते हैं, ‘ब्रह्मचर्य को क्यों नष्ट कर रहे हो? पागल हो जाओगे।’

इस पर महाराज के शिष्य चिट्ठी आगे पढ़ते हुए बताते हैं कि उसने लिखा है, ‘मैं पागल हो गया हूं।’

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