पुलिसकीतानाशाहीऔर_VIPकल्चर गरीब आदमी पर अत्याचार

आखिर कब तक चलेगा यह खेल वीआईपी के नाम पर गरीबों का शोषण

जयपुर की 27 वर्षीय रेशु गुप्ता आज सिर्फ जलने के घाव ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य की चिंता भी झेल रही हैं। महज 25 दिन पहले परिवार का सहारा बनने के लिए मोमोज का छोटा सा कार्ट शुरू करने वाली रेशु अब अस्पताल और पुलिस कार्रवाई के बीच न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं।

रेशु का आरोप है कि 19 जून की शाम जगतपुरा के महल रोड पर वह रोज की तरह अपना मोमोज कार्ट लगा रही थीं। स्टीमर में पानी उबल रहा था। तभी पुलिस की एक गाड़ी वहां पहुंची और कार्ट हटाने को कहा। रेशु के मुताबिक उन्होंने पुलिसकर्मी से कहा कि वह कार्ट हटा रही हैं और स्टीमर में गर्म पानी है। लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद एक पुलिसकर्मी ने स्टीमर को धक्का दे दिया।

अगले ही पल खौलता पानी रेशु के शरीर पर गिर गया। उनकी छाती, हाथ और जांघ बुरी तरह झुलस गए। दर्द से चीखती रहीं, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मी मौके से चले गए। आखिरकार उनकी बहन खुशबू उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचीं।

रेशु कहती हैं कि सबसे ज्यादा दर्द सिर्फ घावों का नहीं, बल्कि भविष्य की चिंता का है। उनका कहना है कि छाती का हिस्सा बुरी तरह झुलस गया है, शादी भी नहीं हुई है और आगे की जिंदगी कैसी होगी, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।

परिवार का आरोप है कि घटना के बाद एफआईआर दर्ज कराने में भी परेशानी हुई। उनका दावा है कि समझौते का दबाव बनाया गया और शिकायत दर्ज कराने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी बाकी है।

रेशु बताती हैं कि पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी उनके और बड़ी बहन के कंधों पर आ गई थी। बीएससी करने के बाद नौकरी नहीं मिली तो करीब 25 दिन पहले ‘हेल्दी आटा मोमोज’ के नाम से कार्ट शुरू किया था, ताकि परिवार का खर्च चला सकें।

अब रेशु की मांग सिर्फ एक है, निष्पक्ष जांच और न्याय।

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