राममंदिर की स्थापना होने के बाद रामलला को चढ़ावा और भेंट खूब प्राप्त हुआ। लेकिन दान की चोरी का आरोप सामने आने के बाद लोग भी अब सामने आकर अपनी भेंट को लेकर आरोप लगाने लगे हैं। कुछ ऐसा ही मामला जौनपुर निवासी कारोबारी के सामने भी आया जो अब चर्चा में आ गया है।
वर्ष 2025 में रामलला को चरण पादुका व हार चढ़ाने वाले अमाई निवासी अजय विश्वकर्मा को आजतक इसकी रसीद नहीं मिल सकी है। वह घर से 22 अक्टूबर 2025 को पैदल अयोध्या के लिए निकले थे। 30 अक्टूबर को सवा किलो चांदी का हार व तकरीबन 300 ग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका श्रीराम को समर्पित किया था।
प्रभु श्री राम पर अटूट विश्वास रखने वाले अजय मुंबई में रहकर कारोबार करते हैं। उन्होंने कहा कि चढ़ावे के बाद रसीद मांगने पर कहा गया कि पंजीकृत कराए गए मोबाइल फोन नंबर पर इसे भेज दिया जाएगा।
हालांकि आजतक उन्हें कोई रसीद नहीं मिली है। साथ ही हार को प्रभु के गले में धारण कराए जाने के बाद फोटो भी उनको आज तक नहीं भेजी गई।
राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे में कथित गबन को लेकर उपजे विवाद पर उन्होंने किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। कहा कि इसकी जांच एजेंसियां कर रही हैं। ऐसे में उन्हें इसे लेकर कुछ नहीं कहना है।
हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से इस लापरवाही को लेकर वह जरूर आहत महसूस करते हैं। हालांकि जांच शुरू होने के बाद अब माना जा रहा है कि चढ़ावे को लेकर नई जानकारी सामने आ सकती है।

