बिहार सरकार को खुला चैलेंज: सुशासन के नाम पर ‘फर्जी एनकाउंटर’ का ये खूनी खेल कब तक? रोहित कौशिक
“जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो हुक्मरानों को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं!
🚩 ब्राह्मण नेता रोहित कौशिक सहारनपुर उत्तर प्रदेश) 🚩
आज बड़े दुख और भारी आक्रोश के साथ कहना पड़ रहा है कि वर्तमान बिहार सरकार में गरीबों, मजलूमों और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले भरत तिवारी को अपने ही तंत्र ने साजिश के तहत लील लिया!
यह सरकार और प्रशासन कितना डरपोक, संवेदनहीन और खोखला हो चुका है, इसका सबूत भोजपुर की इस भयावह घटना ने पूरी दुनिया के सामने रख दिया है। जब भरत तिवारी की बुलंद आवाज से शासन-प्रशासन की चूलें हिल गईं और भ्रष्टाचारियों की नींद हराम हो गई, तो अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए सत्ताधारियों ने पुलिस की बंदूकों का सहारा लिया।
🛑 आत्मसमर्पण का बदला… सीधे सीने में गोली?
- न्याय का सरेआम कत्ल: भरत तिवारी ने जब कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए सरेंडर (Surrender) किया, तो निहत्थों पर बहादुरी दिखाने वाली बिहार पुलिस ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उन्हें गोली मार दी।
- फर्जी एनकाउंटर का खेल: यह कोई मुठभेड़ नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों में बैठकर तैयार की गई सोची-समझी हत्या है! बिहार सरकार जवाब दे कि सरेंडर कर चुके व्यक्ति को रास्ते से हटाना किस ‘सुशासन’ की परिभाषा में आता है?
🔥 ब्राह्मण नेता रोहित कौशिक की हुंकार और हमारी चार मुख्य मांगें:
1️⃣ क्रांतिकारी का दर्जा: गरीबों और कमजोरों की हक की लड़ाई लड़ने वाले अमर शहीद भरत तिवारी को ‘क्रांतिकारी’ की उपाधि दी जाए।
2️⃣ कातिल पुलिसवालों पर मुकदमा: इस फर्जी एनकाउंटर को अंजाम देने वाले और वर्दी को कलंकित करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत हत्या का मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई हो।
3️⃣ साजिशकर्ता नेताओं को कठोर सजा: पर्दे के पीछे से इस पूरे हत्याकांड की स्क्रिप्ट लिखने वाले और पुलिस को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करने वाले भ्रष्ट राजनेताओं को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
4️⃣ परिवार को आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार को तुरंत सरकार की तरफ से भारी आर्थिक मुआवजा और पूर्ण सुरक्षा दी जाए।
बिहार सरकार से सीधा और तीखा सवाल:
ऐसी ‘दमदार’ सरकार का क्या फायदा जो असली अपराधियों और माफियाओं के सामने तो बेबस नजर आती है, लेकिन जब कोई आम आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे सरकारी अमले से खामोश करा दिया जाता है? यह

