मनोज ठाकुर
दक्षिण काली पीठ के समीप गंगा तट एवं आरक्षित वन क्षेत्र में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध निर्माण एवं उसकी सामाग्री जुटाने के लिए गंगा में हो रहे अवैध खनन पर मातृ सदन के परमाध्यक्ष ने उठाए गंभीर प्रश्न; तत्काल कार्यवाही न होने पर विधिक प्रक्रिया आरंभ की जाएगी
मातृ सदन के परमाध्यक्ष परम पूज्य श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानन्द जी महाराज ने दक्षिण काली पीठ के समीप गंगा तट एवं आरक्षित वन क्षेत्र में चल रहे बड़े स्तर पर अवैध निर्माण गतिविधियों तथा इसकी सामग्री जुटाने के लिए गंगा के भीतर किए जा रहे अवैध खनन को लेकर अत्यंत गंभीर प्रतिक्रिया देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मातृ सदन को प्राप्त छायाचित्रों एवं सूचनाओं के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि संबंधित क्षेत्र में चल रहा निर्माण पूर्णतः अवैध है। उपलब्ध चित्रों से यह भी प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य गंगा नदी से 200 मीटर की प्रतिबंधित परिधि के भीतर किया जा रहा है, जो कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इतना ही नहीं, निर्माण गतिविधियां आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर भी संचालित होती दिखाई दे रही हैं, जो वन संरक्षण संबंधी प्रावधानों एवं पर्यावरणीय कानूनों की खुली अवमानना है।
मातृ सदन को यह जानकारी भी प्राप्त हुई है कि वन विभाग के अधिकारी, जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उक्त गतिविधियों से भली-भांति परिचित हैं, किंतु इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति गंभीर प्रश्न खड़े करती है कि आखिर किन प्रभावशाली संरक्षणों के कारण इतने स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष उल्लंघनों के बावजूद प्रशासन मौन बना हुआ है।
पूज्य श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानन्द जी महाराज ने कहा कि यदि प्राप्त सूचनाएं एवं छायाचित्र सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि गंगा, पर्यावरण एवं वन संपदा के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है। गंगा एवं उसके तटीय क्षेत्र किसी व्यक्ति, संस्था अथवा प्रभावशाली समूह की निजी संपत्ति नहीं हैं जिनकी रक्षा करना राज्य का संवैधानिक एवं नैतिक दायित्व है।
मातृ सदन तत्काल मांग करती है कि—
- सम्पूर्ण प्रकरण की तत्काल उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- जांच पूर्ण होने तक सभी निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन करवाने के लिए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल मुक़दमा दर्ज हो ।
- यदि निर्माण NGT आदेशों, वन कानूनों अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन में पाया जाए तो ऐसे समस्त अवैध निर्माणों को तत्काल ध्वस्त किया जाए।
- संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाए।
- हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
मातृ सदन स्पष्ट करना चाहती है कि यदि प्रशासन द्वारा इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संगठन संविधान एवं विधि द्वारा प्रदत्त सभी वैधानिक उपायों का सहारा लेने के लिए बाध्य होगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों एवं अन्य उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध सक्षम न्यायिक एवं वैधानिक मंचों पर कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी।
गंगा एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए मातृ सदन का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा और किसी भी परिस्थिति में गंगा तटों, वन क्षेत्रों तथा प्राकृतिक संसाधनों के विनाश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जारीकर्ता:
मातृ सदन, हरिद्वार

