बाढ़ का कहर भी नहीं डिगा सका आस्था का पर्वत, सड़क किनारे गूंजे “जय मां शाकंभरी” के जयकारे मंदिर के कपाट बंद, लेकिन श्रद्धा रही अडिग; दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने लगाए भंडारे स्वामी साहजानंद जी महाराज

बाढ़ का कहर भी नहीं डिगा सका आस्था का पर्वत, सड़क किनारे गूंजे “जय मां शाकंभरी” के जयकारे मंदिर के कपाट बंद, लेकिन श्रद्धा रही अडिग; दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने लगाए भंडारे

शाकंभरी, सहारनपुर


भीषण बाढ़ के बाद सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर के कपाट भले ही बंद कर दिए गए हों, लेकिन मां के भक्तों की आस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।


शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन की उम्मीद लेकर सिद्धपीठ पहुंचे। मंदिर बंद होने की जानकारी मिलने पर उनके चेहरों पर मायूसी जरूर दिखी, लेकिन श्रद्धा और विश्वास पहले से भी अधिक मजबूत नजर आया।


कई श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर दूर से पहुंचे थे, जबकि कुछ भक्त कई दिनों की पैदल यात्रा कर मां के दरबार तक पहुंचे। दर्शन न होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने सड़क किनारे ही भंडारे लगाकर मां के प्रति अपनी भक्ति और सेवा भावना का परिचय दिया।
शामली से आई 11 सदस्यीय टोली ने बताया कि वे हर वर्ष पैदल यात्रा कर मां के दर्शन करने आते हैं।
बड़ौत के श्रद्धालु पिछले 40 वर्षों से लगातार भंडारा कर रहे हैं।
पानीपत और गंगोह सहित कई क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने खुले स्थानों पर ही प्रसाद वितरण कर अपनी श्रद्धा अर्पित की
/इस बीच शंकराचार्य आश्रम प्रभारी एवं संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहजानंद महाराज ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लोगों से धैर्य बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की/

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