नवनियुक्त गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप ने सोमवार को पौड़ी पहुंचकर मंडलीय आयुक्त कार्यालय में विधिवत कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया तथा मंडल मुख्यालय पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अधिकारियों से परिचय प्राप्त कर गढ़वाल मंडल की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े विषयों की जानकारी ली।
मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का आह्वान किया।
चारधाम यात्रा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा से पूर्व अनिवार्य पंजीकरण कराने और दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। साथ ही कहा कि राज्य सरकार सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड केवल चारधाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध प्रदेश है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अन्य पर्यटन स्थलों व अनछुए क्षेत्रों का भी भ्रमण करना चाहिए, जिससे स्थानीय पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
मंडलायुक्त ने कहा कि गढ़वाल मंडल की समस्याओं का निराकरण उनका प्रमुख दायित्व है और वे अधिकतम समय क्षेत्र में रहकर कार्यों की निगरानी करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा।
गुलदार की बढ़ती समस्या को उन्होंने गंभीर बताते हुए कहा कि इस पर विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर व्यवहारिक और दीर्घकालिक समाधान निकाले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था, अतिक्रमण और जनसरोकार से जुड़े मामलों में प्रशासन प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
आनंद स्वरूप वर्ष 1999 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं, जिन्हें वर्ष 2010 में आईएएस में प्रोन्नत किया गया। राज्य गठन के बाद उनकी पहली नियुक्ति गैरसैंण में हुई। वर्ष 2004 में वे उत्तर प्रदेश गए और 2016 में पुनः उत्तराखंड लौटे। इससे पूर्व वे सचिव-खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले तथा परियोजना निदेशक यूडीआरपीएएफ के पद पर कार्यरत रहे हैं।
इस अवसर पर संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी सहित मंडलीय एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

