✨ परमार्थ निकेतन में आयोजित योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के प्रतिभागियों को प्राप्त हुआ पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य

💫 विश्व के अनेक देशों से आये योग जिज्ञासु परमार्थ निकेतन Parmarth Niketan के आध्यात्मिक वातावरण में योग, ध्यान, गीता, यज्ञ, सत्संग, गंगा आरती और अनेक आध्यात्मिक अनुभवों से हो रहे हैं समृद्ध
🌟 परमार्थ स्कूल ऑफ योग द्वारा संचालित योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स में वेदान्त, गीता सार, ईशोपनिषद्, तत्वबोध, क्रिया योग, शक्ति साधना, योग निद्रा सहित अनेक विधाओं का समावेश
✨ योग जिज्ञासुओं ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया
ऋषिकेश, 6 अप्रैल। गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है, जहाँ विश्व के विभिन्न देशों से आये योग साधक योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के माध्यम से भारतीय सनातन संस्कृति की गहराई को आत्मसात कर रहे हैं।
इस दिव्य अवसर पर प्रतिभागियों को परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। स्वामी जी के सान्निध्य में बिताए गए क्षण उनके जीवन के लिए अविस्मरणीय बन गए। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में स्वामी जी ने कहा— “योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि स्वयं को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है।”
अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, एशिया सहित अनेक देशों से आए साधक यहाँ योग, ध्यान, प्राणायाम, गीता अध्ययन, यज्ञ, सत्संग और गंगा आरती के माध्यम से जीवन के गहन आयामों को अनुभव कर रहे हैं। परमार्थ निकेतन का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें न केवल मानसिक और शारीरिक संतुलन प्रदान कर रहा है, बल्कि जीवन के उद्देश्य को समझने की दिशा भी दे रहा है।
परमार्थ स्कूल ऑफ योग का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत व्यापक है, जिसमें वेदान्त, गीता सार, ईशोपनिषद्, तत्वबोध, क्रिया योग, शक्ति साधना और योग निद्रा जैसी प्राचीन योग विधाओं का समावेश है। यह प्रशिक्षण साधकों को केवल योग शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे साधक बनने की प्रेरणा देता है।

पूज्य स्वामी जी के साथ संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने जीवन, साधना, मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका स्वामी जी ने अत्यंत सरल, करुणामय और गहन उत्तरों से समाधान किया। उनके वचनों ने सभी के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
स्वामी जी ने अपने संदेश में कहा कि आज के समय में योग केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि वैश्विक शांति का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताया गया समय उनके जीवन का एक परिवर्तनकारी अध्याय है। गंगा तट पर ध्यान, दिव्य गंगा आरती और सत्संग ने उन्हें आंतरिक शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव कराया।
परमार्थ निकेतन सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” के संदेश को साकार करता रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को विश्व तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।
इस योग टीचर ट्रेनिंग में योगाचार्य आभा सरस्वती जी, योगाचार्य डॉ. इंदू शर्मा, योगाचार्य गंगा नन्दिनी एवं योगाचार्य गायत्री गुप्ता का विशेष योगदान रहा

