हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन जिला कारागार हरिद्वार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। पंडित अधीर कौशिक

हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन जिला कारागार हरिद्वार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। पंडित अधीर कौशिक

यह आयोजन श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के तत्वावधान में किया जा रहा है।

इस अवसर पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी अपने श्रीमुख से सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। कथा आरंभ होने से पहले कारागृह के श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने भक्ति भाव के साथ कलश यात्रा निकालकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

प्रथम नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्रि का दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था और महाराज युधिष्ठिर का भी राजतिलक इसी शुभ अवसर पर हुआ था।

उन्होंने बताया कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने भी इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए यह दिन हिंदू नववर्ष और आध्यात्मिक आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

कैदियों के जीवन में बदलाव का संदेश
कार्यक्रम के आयोजक पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि हर वर्ष हिंदू नववर्ष के अवसर पर जिला कारागार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है।

उन्होंने कहा कि जेल में सजा काट रहे बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उनके मन को भगवान की भक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से यह धार्मिक आयोजन किया जाता है। उनका मानना है कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी दिव्य कथा है जो मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखती है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से जीवन में गलतियां हो गई हों, तो भगवान की भक्ति और सत्संग के माध्यम से वह अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है।

भागवत कथा से मिलती है जीवन बदलने की प्रेरणा
इस अवसर पर पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत से एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्राचीन काल में एक व्यक्ति था जो जीवन में अनेक गलत कार्य करता था। वह लोगों को परेशान करता और पाप के मार्ग पर चलता था।

लेकिन एक दिन संयोग से उसने संतों के मुख से भगवान की कथा सुनी। उस कथा ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी। उसने अपने गलत कार्यों का त्याग किया, भगवान का स्मरण किया और बाद में वही व्यक्ति समाज में एक आदर्श और सम्मानित व्यक्ति बन गया।

कथा व्यास ने कहा कि यही श्रीमद्भागवत कथा का संदेश है—
भक्ति और सत्संग मनुष्य के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

धार्मिक आयोजनों से मिलते हैं सकारात्मक परिणाम
इस अवसर पर जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने सभी को हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि कारागार में हर वर्ष आयोजित होने वाली भागवत कथाओं से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और वे अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक पहल हैं।इस अवसर पर जिला कारागार अधीक्षक श्री मनोज कुमार आर्य एवं समस्त कारागार का स्टाफ का भरपूर सहयोग रहता है
इस धार्मिक आयोजन में स्वामी कार्तिक गिरी, बलविंदर चौधरी, अमित पुंडीर, बृजमोहन शर्मा, कुलदीप शर्मा, जलज कौशिक, संजू अग्रवाल, संजय शर्मा, रूपेश कौशिक और यशपाल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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